बुधवार, 17 अक्तूबर 2012

आज दांतवाड़ा गांव के लिए गौरव का दिन

जालोर के इतिहास में बुधवार का दिन एक नया अध्याय बन जाएगा। जब सवेरे शुभ मुहूर्त में सिरे मंदिर, भैरूनाथ अखाड़े के गादीपति के रूप में पीर शांतिनाथ महाराज के शिष्य गंगानाथ महाराज ा गादी तिलक किया जाएगा। 1 अक्टूबर को पीरजी के देवलोकगमन के बाद यह महास्थान रिक्त चल रहा था और अब उनकी वसीयत के अनुसार इस पर गंगानाथ महाराज विराजेंगे। समारोह सिरे मंदिर पर सुबह आठ बजे से शुरू हो जाएगा। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। समारोह में जिले भर के अलावा दक्षिणी राज्यों और आसपास के जिलों से भी लोग शामिल होंगे। अनेक लोगों के आने का सिलसिला मंगलवार को ही शुरू हो गया। यह दिन अनेक लोगों के लिए गौरव का क्षण होगा। जब वे अपने आराध्य पीर शांतिनाथ महाराज की गादी पर इस तिलक समारोह के साक्षी बनेंगे। संत गंगानाथ के लिए यह दिन भावनापूर्ण होगा जब वे अपने गुरुदेव के स्थान पर इस गादी पर विराजेंगे।

; सादगी का जीवन
पीरजी जहां भी जाते हमेशा सादगी का संदेश देते। यही कारण था कि उनके कार्यक्रमों में ज्यादा तामझाम नहीं होते थे। वे सहज थे और सरल थे। इसीलिए हर कोई उनसे मिल सकता था। यही हम शिष्यों ने उनसे सीखा।
आज दांतवाड़ा गांव के लिए गौरव का दिन
सिरे मंदिर पर आज होगा गादी तिलक समारोह, पीर शांतिनाथजी के देवलोकगमन के बाद खाली था यह महास्थान, हजारों संतों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में उनके शिष्य गंगानाथ महाराज बनेंगे गादीपति, तैयारियां हुई पूरी, वैदिक मंत्रों के बीच संतों के सानिध्य में होगा समारोह।
करड़ा- कस्बे से मात्र तीन किलोमीटर दूर स्थित छोटा सा गांव दांतवाड़ा। अब तक तमाम प्रकार की चर्चाओं और ख्याति से दूर। सुविधाओं का विस्तार भी यहां कुछ खास नहीं, लेकिन आज इन सभी की चिंताओं से दूर यह गांव अपने आप पर गौरवान्वित हो रहा है। आज का दिन इस गांव के लिए स्वर्णिम बन गया है। जब यहां जन्मा एक साधारण सा बालक अपने तप और निष्ठा की बदौलत पीर शांतिनाथ महाराज का स्थान लेगा। राजाराम नामक यह बालक 21 वर्ष की आयु में दीक्षा ग्रहण कर गंगानाथ के रूप में जाने गए और तब से लगातार पीरजी के साथ ही रहे। आज वे ही गंगानाथ उनके स्थान पर गादीपति बनेंगे। जो इस गांव के लिए गर्व की बात है। शेषत्नपेज १७
बचपन से ही मृदुभाषी
उनके सांसारिक परिजन बताते हैं कि संत गंगानाथ बचपन से ही मृदुभाषी, शांत और धीर-गंभीर रहे हैं। आज भी उनका यही स्वभाव है। काकाई भाई वजाराम देवासी ने बताया की हम दोनों साथ-साथ खेला करते थे। बचपन से ही स्वभाव शांत रहा। आज भी ऐसा ही स्वभाव है। जब भी मिलते हैं तो थोड़ी बहुत बात हो जाती है ज्यादा नहीं बोलते। वहीं भाई हरचंद ने बताया कि यह हमारे पूरे गांव के लिए गर्व की बात है कि पीरजी के स्थान पर गंगानाथ विराजेंगे।
सिरे मंदिर एवं भैरूनाथ अखाड़ा
सिरे मंदिर एवं भैरूनाथ अखाड़ा देश में नाथ संप्रदाय की प्रमुख पीठ है। सिरे मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन है। जहां जलंधरनाथ ने तपस्या की। उन्हीं के नाम से इस शहर का नाम जालोर पड़ा। जोधुपर के राजघराने के लिए यह मंदिर पूजनीय रहा है और राजा मानसिंह ने यहां जीर्णोद्धार का कार्य करवाया। इससे पूर्व परमार राजा रतनसिंह ने यहां शिव मंदिर का निर्माण करवाया। जिन्हें जलंधरनाथ जी ने अपने तपोबल का चमत्कार दिखाया था। यह पीठ हमेशा से ही जन जन की आराध्य रही है। करीब सवा सौ साल पहले भैरूनाथ महाराज ने भैरूनाथ अखाड़े की स्थापना की थी। इसके बाद पीर शांतिनाथ महाराज ने इसका जीर्णोद्धार करवाया। यह दोनों ही स्थान जन जन के लिए आराध्य है और आज गंगानाथ महाराज यहां के गादीपति बनेंगे।
साधारण परिवार में हुआ जन्म
विक्रम संवत 2016 में मार्गशीर्ष का माह था। गांव के साधारण व्यक्ति नगाराम देवासी के घर एक बालक ने जन्म लिया। जिसके बाद पिता नगाराम और माता रकमादेवी की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। बालक का नाम राजाराम रखा गया। बालक धीरे-धीरे बड़ा हुआ, लेकिन मन अन्य बालकों की तरह किसी खेल या उछलकूद में नहीं लगता था बल्कि सारे दिन भक्ति की ही बातें अच्छी लगती। एक बार माता-पिता सिरे मंदिर आए और मन्नत मांगी। मन्नत पूरी होने पर अपने बड़े पुत्र राजाराम को सिरे मंदिर भेज दिया। 21 वर्ष की आयु में उन्होंने पीर शांतिनाथ महाराज से दीक्षा ग्रहण की और इनका नाम गंगानाथ रखा गया। हालांकि दीक्षा से पूर्व ही उनकी सगाई हो चुकी थी, लेकिन इसके अगले दिन ही उन्होंने दीक्षा ग्रहण कर ली और फिर शादी नहीं की। उनके माता-पिता का देहावसान हो चुका है और सांसारिक परिवार में एक छोटा भाई तथा तीन बहनें हैं।
                                                                      जीवन परिचय
गंगानाथ महाराज
गुरु  पीर शांतिनाथ महाराज
दीक्षा 21 वर्ष की आयु में
बचपन का नाम राजाराम
पिता का नाम नगाराम देवासी
माता का नाम रकमादेवी
जन्म स्थान करड़ा के निकट दांतवाड़ा गांव
जन्म मार्गशीर्ष माह विक्रम संवत् 2016
संत गंगानाथ आज से भैरू अखाड़े के गादीपति
 > सादगी का जीवन
पीरजी जहां भी जाते हमेशा सादगी का संदेश देते। यही कारण था कि उनके कार्यक्रमों में ज्यादा तामझाम नहीं होते थे। वे सहज थे और सरल थे। इसीलिए हर कोई उनसे मिल सकता था। यही हम शिष्यों ने उनसे सीखा।
> संत की मर्यादा
उन्होंने हमेशा मर्यादा में रहकर प्रतिष्ठा बढ़ाने की सीख दी। उन्होंने मर्यादा की एक परंपरा बनाई। जो हमने भी उनसे सीखी। वे हमेशा यही कहते कि संतों जैसे गुण जीवन में हमेशा रहने चाहिए।
> सहिष्णुता का पाठ
नाथजी ने सिखाया कि सबसे बड़ा ज्ञान सहिष्णुता का है। सब एक हैं। सबका मालिक एक है। उसी में विश्वास करो। तभी संपूर्ण ज्ञान की प्राप्ति होगी। वे हमेशा सर्वधर्म सद्भाव की बात कहते।
> सभी का सम्मान
नाथजी ने हमें सभी का समान रूप से सम्मान करने की बात सिखाई। भक्त छोटा हो या बड़ा वे सभी को समान मानते थे। सभी के लिए सहज उपलब्ध होते थे। यही हमने भी उनसे सीखा
> सबकी सहायता
नाथजी ने प्रत्येक जरूरतमंद की सहायता करना सिखाया। यदि कोई मदद मांगने के लिए आता है तो उसकी जो भी सहायता की जा सके। जरूर करनी चाहिए। जो कुछ उसके लिए किया जा सकता है उससे ज्यादा करना चाहिए।
> सबके हित की बात
संत गंगानाथ महाराज ने बताया कि नाथजी ने हमेशा सबके हित की बात सिखाई। कोई एक संतुष्ट हो और दूसरा नाराज। ऐसा नहीं होना चाहिए। किसी के साथ भेदभाव या पक्षपात भी नहीं होना चाहिए।
> प्रकृति से प्यार
नाथ जी ने प्रकृति से प्यार करना सिखाया। पेड़ पौधे, जल, मिट्टी, मूक प्राणी यह सभी हमारी ही तरह समझते हैं। नाथजी ने बताया कि हमेशा उनसे प्यार करो। तभी वे तुम्हे अनमोल उपहार देंगे। इसीलिए उन्होंने सिरे मंदिर पर हजारों पौधे लगाए।
'पता ही नहीं चला नाथजी ने कब मुझे इस योग्य समझ लिया'
गादी तिलक समारोह से एक दिन पहले दैनिक भास्कर ने संत गंगानाथ से बात की। यह भावुकता और श्रद्धा का क्षण था। इस महास्थान की ओर बढ़ रहे संत गंगानाथ ने कहा कि गुरुदेव पीर शांतिनाथ के साथ रहते-रहते पता ही नहीं चला कि कब इतना समय बीत गया। कब उन्होंने मुझे इस योग्य समझ लिया कि मुझे इतना बड़ा काम सौंप दिया। कब वे इस प्रकार बीच में छोड़कर चले गए। सब कुछ आज अचानक से हो रहा है, लेकिन उनका आशीर्वाद है कि सब कुछ बिल्कुल वैसे ही चल रहा है जैसा उनके सानिध्य में चलता था। उनके सानिध्य में रहते हुए पता ही नहीं चला कि कैसे वे यह सब संभाल लेते थे। गंगानाथ महाराज ने भास्कर को बताया कि नाथजी की कृपा से ही उन्हें सीखने को मिला। वे बातें जिन पर अक्सर नाथजी जोर दिया करते थे और अब जीवन में उन्हीं बातों को आगे बढ़ाया जाएगा। शांतिनाथजी से यह सीखा उन्होंने।
शुभारंभ की घड़ी
संत गंगानाथ के साथ ही आज का दिन जालोर के धार्मिक इतिहास में नई शुरूआत का दिन, पीरजी के बताए मार्ग पर चलने का लेंगे संकल्प, उनके अधूरे कार्यों को करेंगे पूरा। सवेरे नौ बजे होगा गादी तिलक।
स्वर्णिम यादों के पल
गादी तिलक के इस ऐतिहासिक अवसर पर याद आएंगे पीर शांतिनाथ, उनका सौम्य स्वरूप रहेगा सभी की आंखों के सामने, उनके कृतित्व और व्यक्तित्व को करेंगे सभी याद।
गौरव का क्षण
हम सभी के साथ-साथ आज जिले के दांतवाड़ा गांव के लिए गौरव का दिन, जब इस गांव में जन्मे गंगानाथ आज विराजेंगे इस गादी पर, गांव के लोगों में खुशी, अनेक लोग शामिल होंगे समारोह में। भावुकता का दिन
संत गंगानाथ के लिए आज भावुकता का दिन। अपने गुरु के स्थान पर उनके आशीर्वाद से संभालेंगे गादी। धीरता और गंभीरता के धनी हैं संत गंगानाथ। कहा- मैं हमेशा शिष्य ही बना रहा, गुरुदेव सौंपकर गए बड़ा काम।
ऐतिहासिक अवसर
जालोरवासियों के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर होगा। मौजूदा पीढ़ी के सामने पहली बार भैरु अखाड़े में होगा गादी तिलक समारोह, उमड़ेंगे हजारों श्रद्दालु





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